बुधवार, 10 अक्टूबर 2018

प्रतिउत्तर- हृदय की आवाज

मेरे परमप्रिय

                    शब्दों के इत्तेफाक में यूँ बदलाव करके देख,
            तू देख कर न मुस्कुरा.. बस मुस्कुरा के देख।

                                               ा   देखो यार बात कुछ ऐसी है कि जब हम किसी भी संबंधो की बात करते हैं, चाहे वह जन्मजात संबंध हों या हमारे अपने बनाए, तो उसमे आशा करना सहज व स्वभाविक है। यहीं वो तरीका है जिससे संबंधो मे नवीनता  व प्रगाढता आती है। 
                                               परिस्थितियाँ एक जैसी कभी नही रहती है। ये प्राकृतिक नियम हैं, यदि सूरज उगता है तो ढलता अवश्य है। क्योंकि उसे फिर से आना है। यहीं बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है। अगर दो लोग साथ हैं तो कभी उनके बीच प्यार की कोई सीमा नही दिखती तो कभी कभी थोडा माहौल ठण्डा गरम होता रहता है।  पर कभी भी इन सब बातों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी होती है।
                                               कहतें है कि बात करने  से ही बात बनती है, मगर कभी कभी बात का अर्थ इंसान अपने हिसाब  से लगाता है, तब अर्थ का अनर्थ हो जाता है। यह तो सुनने वाले के तात्कालिक भाव पर निर्भर करता है कि वह क्या सोचेगा। जैसे सुनने वाले का दिमाग यदि किसी अन्य बात या समस्या पर उलझा है तो कम ही संभावना होती है  कि वह सही से बात का अर्थ समझेगा, और उसके बाद बात का बतंगड बनेगा। दूसरी तरफ यदि उसका दिमाग एकतम तरोताजा है और मस्तिष्क वक्ता की बातों पर ही केन्द्रित है तो बातचीत के दौरान यदि कोई असहज बात भी हो जाती है तो उस बाद को ज्यादा भाव न देकर माहौल को हल्का बना देता है या फिर उस पर कोई हास्य विनोद कर देता है । मेरे विचार से बात तभी होनी चाहिए जब अन्य चीजो के हटकर दिमाग उसी जगह पर फोकस कर सकें जिससे बात करनी है।
                                                 अब बात आती है कि मोबाइल से बात करने की। जब कोई दो लोग मोबाईल पर बात करते हैं तो कभी कभी ऐसा होता है कि जो हम सुनना चाहते हैं अगले से , अगला उसे बोल नही पाता है। उसके अनेक कारण है जैसे कि वह अण्डर प्रेशर हो या कि उसे उस समय सही शब्द न मिल रहें हों। फिर आमने सामने की बातचीत में तो व्यक्ति का एटीट्यूड मायने रखता है परंतु मोबाईल पर चीजे आसान नही होती हैं। क्योंकि अगर मोबाईल पर बात से ही किसी को सही से समझा जा सकता तो फिर इंटरव्यू या शादी जैसे महत्वपूर्ण कार्य मोबाईल पर ही संपन्न होते। मोबाईल सिर्फ समय के अभाव मे तत्काल बातचीत में प्रयोग होना चाहिए। न कि मोबाइल पर हुई बात के आधार पर किसे रिश्ते के निष्कर्ष को तलाशना चाहिए। यह नियम सिर्फ ऐसी बातों पर लागू नही होता जहाँ जानबूझ कर रिश्ते का खत्म करने की मंशा से बार बार गलत बात कही जाए।
                                                  तुम कहते हो कि जुडाव वाली फीलिंग कही खो गयी हो गयी है, वो भी कल परसो से? क्या इतने दिनो की फीलिंग दो तीन दिन सही से बात न करने भर से ही खो जा रही है? ऐसे अवसर कभी प्रगट होतें हैं तो क्या सिर्फ तुरंत की हुई बातचीत को आधार बनाकर अपने अंदर चीजे बनायी जाएंगी क्या? जब मेरा अचानक तुमसे बात करने का मन कहे और बात न हो पाए किसी भी कारण से तो क्या मुझे यह निष्कर्ष निकाल लेना चाहिए कि ऐसे ही हमेशा चलेगा। यार मेरे मन मे जो भी फीलिंग हैं वों सिर्फ कुछ दिन के लिए या कुछ साल के लिए नही हैं। सच्ची भावनाएं की कोई कदर करे या न करे परंतु वे सदा सर्वदा के लिए रहती हैं। 
                                               तुमसे जब बात नही हो पाती तो मै यही सोचता हूं कि उसको पता है कि कब बात करने का सही समय है और अपनी बात रख सकते हैं। परंतु मोबाईल पर ही सब कुछ निर्धारित कर लेना या कोई डिसीजन ले लेना एकतरफा फैसला होता है। यार अगर मेरी नीयत में कभी कोई शक होता या कुछ गलत करने का इरादा होता तो या दूर जाने का इरादा होता तो ये बहुत आसान काम है । कुछ लोगो के लिए तो बहुत ही ज्यादा आसान । मगर मैं तुमको सच बताउं कि मेरे लिए सबसे मुश्किल काम है । क्योंकि मेरा अंतर्मन कभी  इस चीज को स्वीकार नही करेगा।  
                                             वर्तमान समय मे हम दोनो की क्या परिस्थितियाँ है इसे हम बखूबी जानते है। पर प्यार के लिए सबसे जरुरी चीज है पवित्र भावना। तुम अकसर मुझसे पूंछते हो कि तुम मुझसे क्या चाहते हो। मै यहीं कहता हूं कि तुमने मुझे हर चीज दी जो अकसर लोगो को नही मिलती, मुझे तुमसे कुछ चाहिए नहीं।  पर तुम शायद इस जवाब से संतुष्ट नही होते। शायद तुम जानना चाहते हो कि हम आगे एकसाथ आएंगे , इस पर मैं क्या सोचता हूंँ । मैं एकदम साफ कर देना चाहता हूँ कि आगे हमारा साथ रहेगा और साथ साथ रहेंगे। कभी तो ऐसा होगा कि मैं तुम्हारी रिस्पांसबिलिटी लेने लायक हो जाउंगा। पर मेरे मन में भी एक डर समाया रहता है कि तुम उस समय अपनी पारिवारिक परिस्थितियों पर सोचोगे या मेरे साथ आने के बारे में। कुछ चीजे तुम्हारी लाईफ मे जुडी है, क्या तुम उन सबसे प्रभावित तो नही होगे न?
                                              मैंने हमेशा तुम्हारे अंदर एक सर्वोत्तम इंसान पाया है। इसी लिए तुम्हारे लिए एंजेल वाली फीलिंग आती है। क्योंकि तुम हर स्थिति में कभी किसी के लिए गलत नही सोच सकते । भले ही वह नेचर की कोई भी रचना हो। ये बात सही है कि अब कभी सोच भी नही पाता कि तुमसे ज्यादा आइडल की मेरी लाइफ मे कोई जरूरत है। अब कल्पना भी नही करता कि कोई आदर्श इंसान मेरे जीवन में आएगा। क्योंकि तुम्हारे रुप में उस अभिलाषा की पूर्ति हो चुकी है।                                               आगे मै जो भी सोचता हूं तुम्हे उसमें शामिल करता हूं क्योंकि मै यह मान चुका हूं कि तुम्हारा   मेरा साथ हमेशा रहेगा। हमेशा